🎣 Phishing Scam क्या है?
फर्जी ईमेल, SMS और लिंक फ्रॉड से बचने की पूरी गाइड
डिजिटल युग में इंटरनेट का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। ऑनलाइन बैंकिंग, सोशल मीडिया और ई-कॉमर्स के बढ़ते उपयोग के साथ Phishing Scam भी तेजी से बढ़ रहा है। फिशिंग एक ऐसा साइबर अपराध है जिसमें अपराधी नकली ईमेल, SMS या वेबसाइट के माध्यम से आपकी व्यक्तिगत और बैंकिंग जानकारी चुरा लेते हैं।
फिशिंग शब्द “Fishing” से लिया गया है, क्योंकि इसमें अपराधी जाल डालते हैं और लोग उसमें फंस जाते हैं।
🔍 Phishing Scam क्या है?
Phishing Scam में अपराधी किसी भरोसेमंद संस्था जैसे बैंक, सरकारी विभाग या लोकप्रिय कंपनी के नाम से नकली संदेश भेजते हैं। जब आप उस लिंक पर क्लिक करते हैं, तो आप एक नकली वेबसाइट पर पहुंच जाते हैं जहां आपसे पासवर्ड, OTP या बैंक डिटेल मांगी जाती है।
⚠ फिशिंग कैसे काम करता है?
- 📧 नकली ईमेल भेजा जाता है
- 📱 KYC अपडेट या अकाउंट ब्लॉक होने का मैसेज
- 🔗 संदिग्ध लिंक पर क्लिक करवाना
- 🔐 लॉगिन या बैंक डिटेल मांगना
📌 Phishing के प्रकार
1️⃣ Email Phishing: नकली ईमेल के माध्यम से ठगी।
2️⃣ SMS Phishing (Smishing): SMS के जरिए लिंक भेजना।
3️⃣ Voice Phishing (Vishing): कॉल के माध्यम से जानकारी मांगना।
4️⃣ Clone Phishing: असली ईमेल की कॉपी बनाकर ठगी।
🛡 फिशिंग से बचने के उपाय
- अज्ञात लिंक पर क्लिक न करें
- वेबसाइट URL ध्यान से जांचें
- HTTPS और Secure Connection देखें
- Two-Factor Authentication सक्रिय रखें
- एंटीवायरस सॉफ्टवेयर का उपयोग करें
🚨 यदि आप शिकार हो जाएं तो क्या करें?
- तुरंत बैंक को सूचित करें
- पासवर्ड और PIN बदलें
- 1930 साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत करें
- राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर रिपोर्ट दर्ज करें
📊 Phishing क्यों बढ़ रहा है?
तकनीक के विकास के साथ फिशिंग ईमेल और वेबसाइट अधिक वास्तविक दिखने लगे हैं। AI तकनीक की मदद से अपराधी व्यक्तिगत जानकारी के आधार पर कस्टमाइज्ड संदेश भेजते हैं।
📌 निष्कर्ष
Phishing Scam आज के समय में सबसे आम साइबर अपराधों में से एक है। थोड़ी सी सावधानी और जागरूकता आपको बड़े नुकसान से बचा सकती है। किसी भी संदिग्ध लिंक या संदेश पर तुरंत विश्वास न करें।
❓ FAQs
Phishing ईमेल कैसे पहचानें?
ईमेल एड्रेस, स्पेलिंग मिस्टेक और संदिग्ध लिंक पर ध्यान दें।
क्या बैंक OTP मांगता है?
नहीं, बैंक कभी भी OTP या पासवर्ड नहीं मांगता।
शिकायत कहाँ करें?
1930 साइबर हेल्पलाइन या राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर।
